इस प्रेम के धागे में
रिश्तों की डोरउलझ गई हैयह तो समय के साथऔर अधिक उलझती जा रही हैमैं इस उलझन को सुलझा पाने में असमर्थ हूंइस प्रेम के धागे...
रिश्तों की डोरउलझ गई हैयह तो समय के साथऔर अधिक उलझती जा रही हैमैं इस उलझन को सुलझा पाने में असमर्थ हूंइस प्रेम के धागे...
मुझे तो मेरी मंजिलएक टुकड़ा जमीन ही चाहिएनहीं चाहिएमुझे कोई नदी, शहर, जंगल, पहाड़, झरना या कोई फैला हुआ आसमान रास्ता जो मैं तय करूंवह...
बर्फ की चादर से ढकी वादियों केसीने में जलते अलावजैसे सदियों के जमे जख्मदिल की भीतरी तहों मेंपिघलने को हो रहे हों बेताबइस सर्द मौसम...
धागा लपेट रही थी गुब्बारे को फुलाते हुएउसने मेरी उंगली काट दीदरअसल वह मांझा था, डोरी नहींएक बात जो अच्छी हुई वह यह किमेरी जान...
जमीन पर रंग रखे और बिखरे हुए दिख रहे हैं तुम्हेंकैनवास पर जो पेंटिंग या स्केच या कोई कलाकृति आदिमैं बनाऊंगीवह भी दिखेगी तुम्हें लेकिनमेरे...
तैर रहे होएक छोटी मछली से तुमअभी तो एक विशाल समुन्दर के पानी की लहरों परएक विस्तृत नीले आसमान के नीचेतुम्हारे जल का रंग औरआसमान...
नीले नभ मेंश्वेत पंछी बादलोंके उड़ रहे।
एक गुब्बारा हाथ में तुम पकड़ोदूसरा पकड़ती हूं मैंगुब्बारों से हो सके तो खेल लोइससे पहले कि इनकी हवा निकलजाये औरये हो जायें बेदमयह जिंदगी...
तुम आगे होमैं थोड़ा पीछे तो फिरक्या हुआयह क्या कम है किहम सब साथ-साथ हैंइस जीवन को एक खेल की तरह ही खेलोहाथ में समय...
नया साल हैनया दिननया सूरजनई आकाश छूती उमंगेंइन बच्चों से ही क्यों न बन जायें हमउड़ जायें हवाओं संगकभी परिंदे तोकभी रंग बिरंगे गुब्बारे बनकरफैलाकर...
आहिस्ता आहिस्ताटुकड़ों में खत्म होती है जिंदगीपूरी कहांअधूरी सी ही जीने को मिलती है यह जिंदगीबर्फ की डली सी यह जिंदगीसर्द मौसम के गुजरते हीपिघलकर...
झूठ की छोड़ोसच बोलने से हीडर लगे है।