छुट्टी का दिन और आराम का तकिया
इस दुनिया में भला कौन होगा ऐसा जिसका मन एक अबोध बच्चे सा नहीं होगा और जिसे छुट्टियां अच्छी नहीं लगती होंगी पसरकर बिस्तर पर...
इस दुनिया में भला कौन होगा ऐसा जिसका मन एक अबोध बच्चे सा नहीं होगा और जिसे छुट्टियां अच्छी नहीं लगती होंगी पसरकर बिस्तर पर...
झील सूखी नहीं जल से लबालब भरी है फिर भी हैरान हूं मैं कि यह स्थिर है शांत है मौन धारण करे एक संत महात्मा...
मुझे जीना कब आयेगा सदियां गुजर गई एक जमाना बीत गया यह वक्त ठहर गया मैं भी रुक गई खामोश हो गई थोड़ा बहुत कुछ...
जो बीत रही है मुझ पर शायद उससे कहीं ज्यादा बीतती है हर किसी पर मुझे पर यह लगता है कि मैं उन जैसी मजबूत...
एक लंबी छलांग लगाने की क्या आवश्यकता है! पग पग धरो और जीवन के पथ पर संभल संभल कर आगे बढ़ो।
तुम जिंदा हो, सांस ले रहे हो। क्या यह काफी नहीं खुद को प्रेरित करने के लिए!
कांच के बक्से में बंद हो एक बुत की तरह एक चांद से चमक रहे हो भीड़ के हर चेहरे को अपनी ओर आकर्षित कर...
आसमान के सिर पे बादल का बंधा सेहरा।
इस घर का कोना-कोना सूना है मेरे मां-बाप की मौजूदगी के बिना वह अपना पता मुझे बता दे तो मैं यहां से उठकर उनके पास...
दिल के कोने में कहीं एक शमा जला दो कि मैं रोशन हो जाऊं जिंदगी भर अंधेरों में ही तो सफर किया है मैंने क्या...
प्रताड़ना की भी कोई हद मुकर्रर होनी चाहिए एक इंसान का जन्म लिया है तो उसमें इंसानियत, शराफत और वफादारी होनी चाहिए यह लोग खुद...
उम्मीद का दामन थामे रखो यह दर्द भी एक रोज हवा में काफूर हो जायेगा और तेरी रूह को चैन आयेगा।