दिल कुछ कहना चाहता है
दिल कभी कितना बेचैन हो जाता है पता नहीं इसके अंदर कितना कुछ भरा है और यह कितना कुछ कहना चाहता है कोई सुनने वाला...
दिल कभी कितना बेचैन हो जाता है पता नहीं इसके अंदर कितना कुछ भरा है और यह कितना कुछ कहना चाहता है कोई सुनने वाला...
मन की अंगीठी से उठ रहा धुआं तन को जलाता है मन को भी जलाता है यह आसमान तक ऊंचा उठता है आसमान के पार...
दर्द सहने की क्षमता बढ़ानी होगी कश्ती है तो आखिरकार अपने ही जीवन की खुद ही खेकर पार लगानी होगी।
साथी तो सच्चा वही है जो उम्र भर साथ निभाए दिल के रिश्तों को बांधे तो किसी पक्की डोर से कच्ची डोर से जो गर...
एक राह है एक मंजिल भी है तू कहीं नहीं।
कुछ लोगों के निकम्मेपन की इंतेहा होती है उनकी आंखों में एक बाल के बराबर भी शर्म नहीं होती अपने अच्छे समय में अपने घर...
क्या कीमत आखिरकार मुझे चुकानी पड़ेगी अपनी जिंदगी को जीने के लिए क्या मेरी सारी उम्र ऐसे ही कटेगी जैसे कभी जिए ही नहीं।
इसको पढ़ा उसको पढ़ा पर खुद को कभी पढ़ा नहीं।
मेरी जिंदगी कहानी अंजानी सी तन्हा, खामोश।
दिल में मेरे जो आता है मैं उसी वक्त कलम से उसे कागज पर उतारती क्यों नहीं बाद में परेशान होती रहती हूं इस बात...
मेरे चेहरे का रंग पीला पड़ गया है यह एक सूखे पत्ते सा मुरझा गया है इसका रंग फीका पड़ गया है दर्द के कारण...
सूरज की जैसे लालिमा हर रोज एक वैसे ही मेरी लिपस्टिक का रंग एक लिपस्टिक के बहुत सारे शेड्स को चुनने में मैं अपना बेशकीमती...