संतोष
न किसी आसमां की तलाश करो न ही किसी मंजिल की एक इंच जमीन मिल जाये अपने पांव उस पर रखने को यह दुनिया हासिल...
न किसी आसमां की तलाश करो न ही किसी मंजिल की एक इंच जमीन मिल जाये अपने पांव उस पर रखने को यह दुनिया हासिल...
कहीं भी बैठ जाओ जहां बैठने की जगह मिले आज मिल रही है कल यह भी नहीं मिलेगी।
कोई किताब न बन सको तो किताब का कवर पेज या बैक कवर या किताब का कोई एक सुंदर पन्ना बनने की ही कोशिश करो...
यह तो जिंदगी के तमाशे हैं जब तक जिंदगी है यह तमाशे चलते रहेंगे जिंदगी खत्म यह तमाशे भी खत्म।
करीब हैं तभी तो दूर हैं इस दुनिया में ऐसे न जाने कितने लोग हैं जिनसे हम हैं बिल्कुल अनजान देखा जाये न हम उन्हें...
हां चल तो मैं नहीं हूं तेरे मन मुताबिक तो चल तू मुझे बता कि क्या तू ही है मेरे मन मुताबिक।
खुद को कम आंकना फितरत है मेरी मंजिल तक पहुंचकर वापस लौट आना आदत है मेरी मैं जिंदा रहूं और मेरी जिंदगी काम आये किसी...
आजा आजा आसमान से उतरकर आजा मेरे आगोश में समा जा मेरी रूह को लुभा जा मेरे दिल का साज बजा जा छेड़ दे कोई...
देखने में तो हीरा लगता है पर शायद है नकली मैं इसे धारण कर लूं अपना लूं संभाल लूं तो संवर जायेगा मेरे साथ जिन्दगी...
मेरे और तुम्हारे रिश्ते की यह हमारे चारों ओर एक भंवर सी बनती परछाइयां काश ऐसे ही उम्र भर बनती रहें मेरे और तुम्हारे प्यार...
फूलों की बहार को बाग से चुराकर यह सड़क किनारे बिछाकर क्या सजा दिया है अनमोल हैं यह तुम इनको भी बेचते हो बाजार में...
फूल ही फूल बिछे हैं चारों तरफ बेहिसाब लेकिन इनकी सुगंध कहां खो गई रंग तो लगे हुए हैं इन फूलों के तन पर अभी...