यह अतीत के वृक्ष की छाया
लोगों को अक्सरयह कहते सुना है किवर्तमान में जीना सीखोन पिछलान अगलाऐसा कुछ सोचोमुझे तो यह बात सच प्रतीतनहीं होतीकुछ लोगों के लिएउनका अतीत ही...
लोगों को अक्सरयह कहते सुना है किवर्तमान में जीना सीखोन पिछलान अगलाऐसा कुछ सोचोमुझे तो यह बात सच प्रतीतनहीं होतीकुछ लोगों के लिएउनका अतीत ही...
एक गुलाब की रंगत लिएफूल सा खिला चेहरा है तेराहोंठ गुलाबीआंख शराबीकेश काली घटाओं से कालेगाल जैसे लाल आग के अंगारेतन तेरा सुंदरमन तेरा सुंदरसिर...
रिश्तों की दीवार मेंदरार हैउस पार क्या हो रहा हैयह देखा जा सकता है परदेखने का मन नहींदिल भर चुका है अब इतना किइसे अब...
मेरे पापा की कारमेरी कितनी अपनी थीवह मेरी उतनी ही अपनी थीजितने थे मेरे पापायह कार भी मेरे पापा की तरह हीसुंदर, सुसज्जित और स्वाभिमानी...
यह मौसम हैअवसाद कादुख कापतझड़ काऐ मेरी आंखोंऐसे अवसर पर भीतुम हंस रही होमुस्कुरा रही होखिलखिला रही होतुम्हें तो रोना चाहिएआंसुओं को बूंद बूंद बरसाना...
सही को सहीगलत को गलत कहेंसब सही होगा।
होली के रंगों में रंगे सब एक जैसे दिखते हैं एक दूसरे को बाजुओं में कसे, आंखों से प्रेम का रस छलकाते, सब एक...
दिखती हूंशांत लेकिनहूं नहींअशांति की जड़ें मन केधरातल के भीतर कहींगहरी एक नाग के फन सीतनी हुई बैठ गई हैंकोई यत्न तो आवश्यक रूप सेकरना...
आज रहना है खामोशकिसी से कुछ नहीं कहना हैखुद से लेकिन बोलना यासंवाद करनाक्या कहीं रुकेगाशायद नहीं तोचुप रहने से क्या हुआ फायदामौन को कहीं...
यह गुस्सा कहां से आता हैएक सुंदर कन्या के चेहरे के नाक नक्श को बिगाड़ जाता हैदर्पण भी उसे यह कहने को बाध्य हो जाता...
आसमान की छत सेटपक रही जोओस की बूंदेंएक पत्ते की चिकनी देह पर तोसंभल नहीं पा रहीठहर नहीं पा रहीस्थिर नहीं हो पा रहीपत्ते की...
आज भीजैसे हर रोज होती हैसुबह हुई हैसूरज भी अपने समय पर उदित हुआ हैउसका प्रकाश चारों ओर फैला हैउसका कोई भी हिस्सा लेश मात्र...