इस घड़ी को देखकर लगता है कि
कई बार इस घड़ी को देखकर लगता है कि जैसे मैं भी किसी गुजरे हुए एक पल की कोई भूली बिसरी हुई कहानी सी हूं...
कई बार इस घड़ी को देखकर लगता है कि जैसे मैं भी किसी गुजरे हुए एक पल की कोई भूली बिसरी हुई कहानी सी हूं...
यह अपने हाथों में भिक्षा पात्र लेकर कहां जा रहे हो ऐ बंधुओं जबकि तुमने तो अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया है अपना बहुमूल्य जीवन...
आज मैं खुश हूं बहुत खुश हूं कोई मुराद पूरी नहीं हुई है कुछ हासिल भी नहीं किया है किसी मंजिल की तलाश भी नहीं...
तुम और मैं सूरज की किरण चंदा की डोर।
चलो चले आज दिलदार चांद के पार नहीं आसमान के रंगों के उस पार सूरज के लालिमा बिखेरते सिंदूरी रंग के पार आज हम चले...
दर्द की नदी एकदम शांत थी एकाएक यह अशांत होकर कहर ढा देगी यह अनुमान भला किसे था जो दिखता है वह होता कहां है...
करीब आयी मैं जितना अपनों के उन्हें उतना ही पराया पाया अफसोस रहेगा मरते दम तक कि ऐसे नासाजों को मैंने क्या सोचकर था अपने...
कितना अच्छा हो ना कि मैं खुद की पनाहों में ही कैद हो जाऊं मैं खुद में ही कहीं जज्ब हो जाऊं मैं खुद में...
मैं औरत हूं यह भी सत्य कि इंसान भी हूं।
यह कैसे रिश्ते हैं बेजान से जिनके साथ कट रहा है मेरी जिंदगी का सफर न इनके साथ रहा जाता है न ही जुदा होना...
जिंदगी और मौत के बीच दूरी चंद लम्हों की होती है जिंदगी गले लगा लेती है मौत को और मौत ठुकरा देती है जिंदगी को...
तुम चाहे तो अपने लबों से कितना भी मुस्कुरा लो लेकिन तुम्हारी उदास आंखें तुम्हारे दिल की सारी कहानी तुम्हारे बिना बोले खामोशी से बीच-बीच...