मेरी याद के आंसू
जब थे तो बेशक न होते लेकिन अब नहीं है तो उन्हें मौजूद होना चाहिए सच में यथार्थ में मेरी आंखों के समक्ष खड़ा हुआ...
जब थे तो बेशक न होते लेकिन अब नहीं है तो उन्हें मौजूद होना चाहिए सच में यथार्थ में मेरी आंखों के समक्ष खड़ा हुआ...
दिल की कश्ती बिना पानी चलती हौले हौले से।
एक फूल है कोई खिला हुआ इसे उपवन में ही रहने दो इसे न तोड़ो किसी पेड़ की शाख से इसे पेड़ के पत्तों की...
हे कान्हा मेरे सलोने कान्हा इस जग में सबसे सुंदर मेरे कान्हा एक मनमोहक छवि के धनी तुम कान्हा मुरली बेजान सजती जो तुम्हारे अधरों...
हम दोनों को मिलती है जो प्रेरणा कहीं न कहीं से मसलन प्रकृति से तो हम दूसरों को भी प्रेरित करते हैं सूरज और चांद...
फूल थे पत्ता पत्ता क्यों बिखर गये हो पत्तों के साथ रहते थे अब उन्हीं के रंग में क्यों रंग गये हो तुम्हारी कोई मजबूरी...
जल की एक बूंद बहाना जैसे रक्त बहाना।
रोज सुबह तुम खिलते हो आसमान में उगते सूरज से भी मिलते हो आकाश को छूने की तुम्हारी तमन्ना कुछ रंग तो दिखा रही है...
पहले सूरज साथ लेकर चलती थी अब उनकी यादों का दीपक साथ लेकर चलती हूं जैसा भी है समय और जैसे भी हैं हालात लेकिन...
यह जीवन भी कभी कभी स्थिर हो जाता है कुछ समय के लिए एक तस्वीर सा ही इसे पुनः इसकी यथास्थिति में लाने के लिए...
आकृतियां सी बनती दिख रही हैं मुझे तो इस हरे भरे घनेरे जंगल में पेड़ों को चीरता सूरज का प्रकाश है तो परछाइयां भी बन...
ऐ भिक्षु तुम इस रास्ते से चलायमान बेशक हो लेकिन कहीं एक पेड़ के समान खामोश हो गये हो तुम जीवन के कठिनाइयों से कहीं...