यह जहन्नुम क्या बला है
उसने मुझेनाराज होकरयह कह तो दिया किजा मरजहन्नुम में जायह कहकर वह तो चला गयालेकिनजाते-जाते बताकर नहीं गयावहां का पताअब मैं किससे पूछूं कि यह...
उसने मुझेनाराज होकरयह कह तो दिया किजा मरजहन्नुम में जायह कहकर वह तो चला गयालेकिनजाते-जाते बताकर नहीं गयावहां का पताअब मैं किससे पूछूं कि यह...
मन का आकाशशांत थातन के धरातल पर लेकिनहलचल थीइस विरोधाभास का द्वंद मेरे भीतरकहीं चल रहा था लेकिनदुनिया की आंखों कोइसका आभास तनिक भी नहीं...
तन भी सुंदरमन भी सुंदरएक फूलों की बहार की रंगतसमेटेगुलशन में खुशबू लूटातेगुलाब के एक अंबार सी सजी खड़ी हैमेरी प्यारी बहनादूर देश में रहती...
पगडंडी पर चलने कोदिल बेचैन है परइस पर चलना होगाथोड़ा सा संभल केयह एक कांच सी नाजुक हैकच्ची मिट्टी से बनी इसकी देह हैकमर इसकी...
जिंदगी समझ आती हैपूछ रही हूं तुमसे मैं यह सवालमुझे तो नहीं आतीमुझे लगता है किइसे समझने की चेष्टा भीकरनी नहीं चाहिएकुछ समझ आकर भीकुछ...
कहने कोयह घर अभी भीएक घर सा ही दिखता हैनहीं है यह राख या भस्म काकोई टीला लेकिनजो इसमें रहता हैउससे पूछो तो 'है'दिखता है...
कोई भी प्रतीक्षालयबना ही होता हैइस मकसद के साथ किवहां कोई आराम से बैठकर या खड़े होकरप्रतीक्षा करेकिसी घटना, प्रसंग, नियुक्ति, भेंट आदि के लिएरेलवे...
जमीं कह रहीआसमान से किप्यासे हैं मेरे लबएक अरसे सेटूटकर बरस जाओ मुझ पर औरमेरी प्यास बुझा दोतृप्त हो जाऊं जब मैं थोड़ा तोकुछ पल...
चेहरा तेरादर्पण में तैरतेएक चांद सा।
फूलों का गुलदस्तान किसी को देना चाहिएन किसी से लेना चाहिएन इसे कहीं किसी अवसर परसजाना चाहिएहम क्यों तोड़ें किसी बगिया सेइतने फूलों कोएक फूलचाहे...
किसी के हृदय की सरलता कोभला कौन समझता हैआजकल के जटिलताओं से भरेजमाने मेंदर्पण भी नकार देता हैकिसी के भोलेपन कोवह भी अब फिदा हैउलझा...
तुम्हारी खामोशीमेरे मन में एक टीस सी पैदाकरती हैजो भी हो कारण लेकिनइसके लिए कहीं मैं खुद कोदोषी ठहराने लगता हूंथोड़ी बहुत देर के लिए...