तुम्हारी लाल चुनर के प्रतिबिंब सी
तुम भी मुझे तोएक देवी सी ही प्रतीत हो रही होएक लाल चुनर सुनहरी गोटे कीकिनारी वाली ओढ़करतुम्हारा चेहरा चमक रहाएक पूर्ण रूप से खिले...
तुम भी मुझे तोएक देवी सी ही प्रतीत हो रही होएक लाल चुनर सुनहरी गोटे कीकिनारी वाली ओढ़करतुम्हारा चेहरा चमक रहाएक पूर्ण रूप से खिले...
शहर मेंएक चौराहे परखड़ीदेखती रहती हूंगांव की तरफ जाती हुईमेरे शहर की सड़क कोशहर की सड़क ही तो गांव कीसड़क से किसी मोड़ पर मिलजाती...
मैंने पहनी हुई हैएक पत्तों की पोशाकअपने जिस्म परपतझड़ का मौसम थापेड़ के सारे पत्ते झड़ चुके थेकुछ हवा संग उड़ गये थेकुछ जमीन पर...
पानी का एक बुलबुला हूं मैंमेरा क्या सिलसिला होगा औरवह भी मोहब्बत काइबादत कामुस्कुराहट काहिफाजत कानफासत काभूल जाओऐसा कभी कुछ भी नहीं होगाजब तक यह...
एक आता हैदूसरा जाता है, मैंवहीं की वहीं।
प्रेम की प्यासीप्रेम के तत्व को खोजती फिरती हूंमिलता भी है कहीं परथोड़ा बहुत औरवह भी बस कुछ समय के लिएपलक झपकते ही फिर आंखों...
रिश्तों की डोरउलझ गई हैयह तो समय के साथऔर अधिक उलझती जा रही हैमैं इस उलझन को सुलझा पाने में असमर्थ हूंइस प्रेम के धागे...
मुझे तो मेरी मंजिलएक टुकड़ा जमीन ही चाहिएनहीं चाहिएमुझे कोई नदी, शहर, जंगल, पहाड़, झरना या कोई फैला हुआ आसमान रास्ता जो मैं तय करूंवह...
बर्फ की चादर से ढकी वादियों केसीने में जलते अलावजैसे सदियों के जमे जख्मदिल की भीतरी तहों मेंपिघलने को हो रहे हों बेताबइस सर्द मौसम...
धागा लपेट रही थी गुब्बारे को फुलाते हुएउसने मेरी उंगली काट दीदरअसल वह मांझा था, डोरी नहींएक बात जो अच्छी हुई वह यह किमेरी जान...
जमीन पर रंग रखे और बिखरे हुए दिख रहे हैं तुम्हेंकैनवास पर जो पेंटिंग या स्केच या कोई कलाकृति आदिमैं बनाऊंगीवह भी दिखेगी तुम्हें लेकिनमेरे...
तैर रहे होएक छोटी मछली से तुमअभी तो एक विशाल समुन्दर के पानी की लहरों परएक विस्तृत नीले आसमान के नीचेतुम्हारे जल का रंग औरआसमान...