दर्द के दरिया
अपने अपने नहींपरायों को अपना बनाने कीकोशिश हैहाथ आखिर में कुछ नहीं आयेगा लेकिन ऐसे लोगों को होता फिर भी नहीं कोई अफसोस हैजिन्हें ठुकराया...
अपने अपने नहींपरायों को अपना बनाने कीकोशिश हैहाथ आखिर में कुछ नहीं आयेगा लेकिन ऐसे लोगों को होता फिर भी नहीं कोई अफसोस हैजिन्हें ठुकराया...
एक हवा का झोंका आया थाखुशबुओं भरापलक झपकते ही परगुजर गयाएक चिड़िया जैसे बैठी होपेड़ की एक डाल परइस पल औरवह उड़ जाये फिरअगले ही...
कभी गौर से देखनाकोई दिन किसी व्यक्ति काऐसा नहीं गुजरता होगा जोबिना शिकवे शिकायतों के होएक अदालत कक्ष तो किसी केमन के भीतर स्थाई रूप...
मैं तो मानती हूंइस संसार को अपना घर औरइसके हर सदस्य को अपना परिवारमानो तो हर कोई अपना है अन्यथा अपनी सांसे भी उधार की...
एक सूखा गुलाबकभी एक खिला हुआ गुलाब थाकिसी गुलशन की बहार थाएक आशिक का ख्वाब थाएक महबूबा के साजो सज्जा का सामान थादिल से दिल...
तेरे गालों पेक्या गुलाल मलूंवह तो पहले से ही गुलाबी हैंबेशुमार गुलाबों की रंगत लिएउन्हें और क्या गुलाबी करूंहोली का दिन हैउड़ रहा गुलाल चारों...
लोगों को अक्सरयह कहते सुना है किवर्तमान में जीना सीखोन पिछलान अगलाऐसा कुछ सोचोमुझे तो यह बात सच प्रतीतनहीं होतीकुछ लोगों के लिएउनका अतीत ही...
एक गुलाब की रंगत लिएफूल सा खिला चेहरा है तेराहोंठ गुलाबीआंख शराबीकेश काली घटाओं से कालेगाल जैसे लाल आग के अंगारेतन तेरा सुंदरमन तेरा सुंदरसिर...
रिश्तों की दीवार मेंदरार हैउस पार क्या हो रहा हैयह देखा जा सकता है परदेखने का मन नहींदिल भर चुका है अब इतना किइसे अब...
मेरे पापा की कारमेरी कितनी अपनी थीवह मेरी उतनी ही अपनी थीजितने थे मेरे पापायह कार भी मेरे पापा की तरह हीसुंदर, सुसज्जित और स्वाभिमानी...
यह मौसम हैअवसाद कादुख कापतझड़ काऐ मेरी आंखोंऐसे अवसर पर भीतुम हंस रही होमुस्कुरा रही होखिलखिला रही होतुम्हें तो रोना चाहिएआंसुओं को बूंद बूंद बरसाना...
सही को सहीगलत को गलत कहेंसब सही होगा।