यह पर्दा है मेरी कल्पनाओं की तरह
कमरे के पर्दे को हटायाइस उम्मीद के साथ किअंदर तो अंधकार हैशायद बाहर उजाला हो लेकिनबाहर तो अंधेरा काला स्याह थाकुछ भी नहीं दिख रहा...
कमरे के पर्दे को हटायाइस उम्मीद के साथ किअंदर तो अंधकार हैशायद बाहर उजाला हो लेकिनबाहर तो अंधेरा काला स्याह थाकुछ भी नहीं दिख रहा...
ऐ आसमान सेलगातार गिर रही बारिश कीबेहिसाब बूंदोंतुम बरसना कब बंद करोगीमुझे अपनी मंजिल तकपहुंचने के लिएकदम उठाने दोगी याएक रास्ते के मोड़ के किनारे...
बारिश मेंआज भीगने का नहीं बल्किखुद को सुखाने का दिलचाह रहा हैयह ख्वाहिशों का मिजाज भीबदलता रहता हैमौसम के बेहिसाब रंगों की तरह ही कभी...
परिंदा हूं मैं मुझे मुक्ति चाहिए बंधन नहीं।
यह बंधन भीएक कुछ अजीबघुटन सी देने वालीकोई चीज होती हैयह रिश्तों के जाल को काटकरहर कोई इनसे एक धुएं के गुबार की तरहआजाद होना...
सूरज तुम जा रहे होकुछ पलों का साथतुम्हारे साथरह गया है शेषकल सुबह जब तुम उगोगे तोफिर मुलाकात होगीजब तक रहेगी जिंदगीतुमसे सुबह से शाम...
सांझ ढलने से पूर्वसूरज की गेंद कोअपने हाथों से पकड़ना हैथोड़ी देर इसके साथ खेलना हैअपने जश्न की खुशी में इसे भी शामिल करना हैयह...
जीवन के रास्ते थेकठिन लेकिनसाथ मिला जो तुम्हारा तोपार कर ही लियेमंजिल के पहले पड़ाव को तोपा लियापहाड़ के शिखर पर तो पांव अपनाधर दियासूरज...
सांझ के सूरज के संगमैं ढल रही हूंसुबह के सूरज के साथमैं उग रही हूंरात के चांद के साथरात भर करती हूं बातेंसो जाती हूं...
ख्वाबों का मेला सज रहा आंखों में धड़कन सा।
हवा भीआज गुमसुम हैमेरी ही तरहरवानगी से बहतीकोई कहानी भी नहीं सुना रहीजिंदगी की कहानियांसमझते और सुनाते हुएउम्र भरशायद मेरी तरह यह भी थक चुकी...
न रास्तान मंजिलन कोई मोड़ हैराहों मेंऐसे में क्या ख्वाब बुनूंकमरे की बंद खिड़की सेकोई चांद भी नहीं दिख रहाआज रात के खुले आसमान में।