हे प्रभु तुम सर्वशक्तिमान हो
हे प्रभु तुम कहां हो पुकारती रहती मैं तुम्हें हर प्रहर संकट की घड़ी है डालो मुझ पर अपनी मेहर की नजर यूं तो मैंने...
हे प्रभु तुम कहां हो पुकारती रहती मैं तुम्हें हर प्रहर संकट की घड़ी है डालो मुझ पर अपनी मेहर की नजर यूं तो मैंने...
मैं अपने घर में ही हो चली हूं पराई अब मैं सिर छिपाने के लिए पल दो पल राहत पाने के लिए किसी पर अपना...
जीवन के उस मुकाम पर पहुंच चुकी हूं कि अमृत और विष में कोई अंतर महसूस नहीं होता विष पीती हूं पर उसका असर भी...
मैं दयावान हूं दया मुझमें बहुत है मैं जितनी दूसरों की सेवा करना चाहता हूं न जाने क्यों पर उतनी कर नहीं पाता मैं पाता...
सुनो ऐ बालक मेरे छोटे से कृष्ण कन्हैया जरा इधर तो आओ लो मेरे हाथ में जो बांसुरी है उसे तुम अपने नन्हें हाथों से...
पहले उसको लगा कि वह ठीक हो रहा है भगवान शायद उसको एक मौका और दे रहा है जिन्दगी जीने का कुछ समय इस दुनिया...
मुझे शांति चाहिए मानसिक शांति मुझे शांति की तलाश है लेकिन कैसे कौन सा मार्ग अपनाऊं कि इसे प्राप्त कर पाऊं मानसिक शांति को अपने...
विवाह कभी भी हो किसी भी उम्र में हो लेकिन इसका अंत इसके आरंभ की तरह ही सुखदायी होना चाहिए जब तक दिल गवाही न...
मैं भी डायरी गर कहीं लिखती होती तो ठीक से बता पाती कि कौन से साल की कौन सी तारीख के कौन से दिन मैंने...
धूप ही नहीं निकलती जिन ठंडे प्रदेशों में या जिन स्थानों तक धूप नहीं पहुंचती वहां वसंत ऋतु के आगमन पर भी फूल अक्सर मुरझा...
वो बचपन के दिन और वो चांदनी रातें वो छत और छत से दिखता एक खुला आकाश रात का पहरा उस पर एक फूल सा...
एक सुनसान रास्ते पर खड़ा हूं मंजिल कहीं दिखती नहीं हमसफर कोई साथ नहीं मंजर भी हसीन नहीं कंधे पर अपने गमों का बोझ एक...