शांति का बांध
शांति का बांध जो टूटा फिर कभी शांत न हुआ।
शांति का बांध जो टूटा फिर कभी शांत न हुआ।
शांति जब भी भंग होती हैबहुत शोर करती हैएक आंधी के वेग सी तेज होती है और चारों तरफबहुत तबाही मचाती हैकिसी का चेहरा उदास...
यह तन मनुष्य काएक जंगल ही तो हैउसका मन एक मरुस्थलउसकी आत्मा एक खुला विस्तृत आकाशजीवन की यात्रा पर निकले हो तोएक साहसी योद्धा से...
सांझ की बेला हैधुंधली पड़ती रोशनीअंधकार का आगमन होने वाला है सूरज ढलने वाला हैचांद आसमान में एक फूल साखिलने वाला हैमेरी पलकों की चिलमन...
मैं खामोश हूंचुपचाप तन्हा किसी कोने मेंदुबककर बैठे रहनाअब मुझे अच्छा लगने लगा हैकानों में गूंजती रहती हैंमेरे अतीत की यादों कीप्रतिध्वनियांमंदिर में बजती घंटियों...
अंधकार गहराता जा रहा हैउस जलते हुए दीपक की रोशनीसमय के साथशनैः शनैः क्षीण हो रही हैउसका स्थान ले रहा हैरात्रि का चमकता हुआ चांददूर...
अतीत में ध्वनि तो विद्यमान थीतभी तोवर्तमान में उसकी प्रतिध्वनिदिखाई पड़ती हैसुनाई पड़ती हैमहसूस होती हैअंतर्मन में उतरती हैएक साध्वी की मौन साधना सी शीतलता...
हर रंग फीके लग रहे हैंचटकीले भीयह मेरी आंखों का भ्रम नहीं हैजिंदगी भर का मिला तजुर्बा हैरेल की पटरी पर से गुजरतीसरपट दौड़ती रेलगाड़ीआंखों...
फूल सा तेरा चेहरा चांदनी का स्पर्श लिए।
जिंदगीतू आखिर चाहती क्या हैजिसको जन्म देती हैइस धरती पर लाती हैउसकी जिम्मेदारी क्यों नहीं उठातीउसका जीवन चक्रठीक प्रकार से पूरा क्यों नहीं करतीतू कुछ...
इस जिंदगी कोजीने के लिएअपना दिल कितना बड़ा करूं मैंकुछ भी करने की एक सीमा होती है एक गुब्बारे को भी एक हद तक ही...
कई बारयह समझ नहीं आताजिंदगी की दौड़ में किहम जीत रहे हैं याहार रहे हैंअगला पल जीवन की बहार लेकर आ रहा है यापतझड़ की...