विश्वास की ताकत
मेरे हाथ में चार अंगुलियां और एक अंगूठा है यह पांचों मेरे विश्वास के प्रतीक हैं प्रथम अंगुली मैं स्वयं हूं मुझे सबसे अधिक खुद...
मेरे हाथ में चार अंगुलियां और एक अंगूठा है यह पांचों मेरे विश्वास के प्रतीक हैं प्रथम अंगुली मैं स्वयं हूं मुझे सबसे अधिक खुद...
नदी तुम कितनी अच्छी हो कितनी सच्ची हो एक दर्पण की तरह तुम्हारा दिल साफ है तुम्हारा जल साफ सुथरा और स्वच्छ है तुम शांत...
दर्पण में देख मैं खुद को संवारती हूं भूल जाती हूं हमेशा कि दर्पण भी चाहता है कि कोई उसे भी संवारे मेरे चेहरे की...
मेरे पास समय नहीं है तो क्या सिर्फ और सिर्फ अपने मां बाप अपने भाई बहिन अपने परिवार के लिए ही समय नहीं है अपनी...
चारदीवारी को घर नहीं कहते जहां हो हर समय किसी का अपमान और खिड़की, दरवाजे खुले होने पर भी सांस न आये उसे घर नहीं...
किसी लंबी समुद्री यात्रा या जलयात्रा के बारे में सोचकर भी मैं तो सिहर उठती हूं मुझे पानी से बहुत डर लगता है यह दूर...
उस रात क्या कुछ अप्रत्याशित घटित नहीं हो सकता था वह एक सर्द काली अंधियारी रात थी देर शाम सूरज के डूबने के बाद जब...
आदमी एक ही होता है पर हर पल उसके रंग अलग रूप अलग भाव अलग अलग होते हैं कभी किसी बात पर वह हर्ष से...
मां इस दुनिया में तू मुझे सबसे प्यारी इतना प्यारा मुझे कोई दूजा नहीं भगवान से भी ऊंचा तेरा स्थान तेरे स्मरण मात्र से मेरा...
अपने प्रभु के प्रति भक्ति दिल में होती है इसके लिए किसी दुकान को सजाने की आवश्यकता नहीं प्रदर्शन की जरूरत नहीं आडंबर की अनिवार्यता...
रेलगाड़ी और रेलवे स्टेशन इस दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज रेलवे स्टेशन की बेंच पर इत्मीनान से पैर फैलाकर बैठ जाओ हाथ में चाय की...
आकांक्षा एक मित्र की तरह होनी चाहिए इसके पीछे हाथ धोकर पड़ गये तो यह कहीं फिर मित्र कम, शत्रु अधिक न बन जाये आकांक्षाओं...