किसी दिन मृत घोषित
मैं कौन हूं एक इंसान एक शैतान एक पशु या इनके बीच की ही कोई कड़ी मैं जिन्दा हूं मैं मृत हूं या मैं भटकती...
मैं कौन हूं एक इंसान एक शैतान एक पशु या इनके बीच की ही कोई कड़ी मैं जिन्दा हूं मैं मृत हूं या मैं भटकती...
मेरे घर जब भी कोई मेहमान आता है तो हाथ में एक तराजू लेकर आता है मेरा वजन उसमें तोलने के लिए सवालों की भी...
जिससे हो प्यार वह हो जाये गर जुदा तो उसकी याद सताती है वरना इस बेरहम और जालिम दुनिया में कहां किसी को किसी की...
मेरे पापा प्यारे पापा दुनिया के सबसे प्यारे पापा जब जब मैं देखूं आपको भूल जाती सब कुछ खो देती अपनी सुध बुध पापा आपने...
मन में सवाल कई हैं लेकिन मैं अब तुमसे कभी कोई सवाल नहीं पूछूंगी तुम्हारे साथ रहते रहते तुम्हारी रग रग से वाकिफ हो गई...
तू उतरे जो न पटरी से और किसी हादसे को अंजाम न दे तो सुन ओ रेलगाड़ी तू मुझे इस दुनिया की सबसे प्यारी चीज...
रिश्तों पर जो एक धुंध की चादर चढ़ी है यह अब कभी न उतरेगी मौसम को बदलते देखा है लेकिन इस दुनिया के लोगों को...
मेरी पतंग मेरे आसमान की मेरे घर सी।
जिन्दगी एक जंग है प्रेम की गली इसकी तंग है नफरत की आंधी है हर दिशा फैली गुलिस्तां हैं उजड़े बहारों के घर हैं बिखरे...
मन भीतर से खुश होता है जब खुशी के रंग चारों तरफ बिखरते हैं तब मन नाचता है झूमता है मन ही मन गुनगुनाता है...
खामोश हूं परेशान हूं जिन्दगी की कशमकश भरी उलझनों से हैरान हूं दिल तोड़ रही है अब तो उसकी हर बात दिन की रोशनी भी...
तन से चाहे कमजोर हो जाऊं लेकिन हे प्रभु मुझ पर इतनी कृपा बनाये रखना कि मुझे मन से कभी न कमजोर करना मैं कभी...