• दर्पण

    आसमान तुम भी तो एक दर्पण से ही हो लेकिन तुम मुझे मेरी छवि नहीं दिखाते हो अपितु प्रभु की दिखाते हो अपना नीला आवरण...

  • ईश्वर

    ईश्वर तुम कहां हो मैं तुमसे मिलने कहां आऊं तुमसे मिलकर मुझे क्या मिलेगा मैं तुमसे गर न मिलूं तो क्या तुम मेरा अहित करोगे...

  • प्रेम कहानी

    यह एक ऐसी प्रेम कहानी है जो काल्पनिक है जो प्रेम कहानी पूरी न हो पाये अधूरी रह जाये एक सच बनकर दुनिया को दिख...

  • अजनबी

    अजनबी तो इस दुनिया में सब हैं वह कौन है जो खुद को भी कहीं जानता हो एक माटी का चोला हैं सब जिसमें समाई...

  • युद्ध और शांति

    युद्ध जहां देखो वहां युद्ध ही युद्ध अंतर्मन में युद्ध घर में युद्ध देश के अंदर युद्ध देश की सीमाओं पर युद्ध देश के भीतर...

  • आंखें

    मैं तो उन आंखों की तरफ देखती हूं जिनमें होता है प्यार उन आंखों की तरफ भला मैं क्यों देखूं जिनमें होती है नफरत और...

  • परिवार

    मेरा परिवार तो मेरे मां बाप ही थे उनके देहांत के पश्चात तो कोई दूर दूर तक अपना सा प्रतीत नहीं हो रहा परिवार की...

  • खामोशी

    घर के बाहर कितना शोर है कितनी रौनक है कितनी हलचल है एक मेरा घर ही है जहां जिधर भी नजर दौड़ाओ बस खामोशी ही...

  • मेरे भाई बहिन

    मेरे एक भाई है और एक बहिन भी दोनों मुझसे छोटे हैं और मेरे बिल्कुल अपने और सगे लेकिन मैं उनके लिए कितनी अपनी हूं...

  • प्यार के आंसू

    प्यार का सागर इतना गहरा और विशाल है कि जब जब उस प्यार को याद करूं दिल भर आता है पर आंसू छलक नहीं पाते...

  • दोस्ती

    दोस्ती एक बहुत ही पाक साफ रिश्ता है जिंदगी में किसी को कोई एक दोस्त भी अच्छा मिल जाये और उसका साथ बना रहे तो...

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