एक तपस्वी का तप
मैं एक तपस्वी हूं अपने मन के पावन तपोवन में मैं दिन रात, सुबह शाम, हर प्रहर, हर पल तप करती हूं अपनी साधना में...
मैं एक तपस्वी हूं अपने मन के पावन तपोवन में मैं दिन रात, सुबह शाम, हर प्रहर, हर पल तप करती हूं अपनी साधना में...
तुम्हारे पत्र ने अभिभूत किया मुझे जीवन के खाली कैनवास पर प्यार का हर एक रंग भरा इसने जीवन का अर्थ समझाया जीवन जीने का...
मेरे दिल में रहती है मेरी मां घर में कहीं नहीं दिखती लेकिन मेरी आंखों की पलकों की पालकी में बैठी है मेरी मां इंसान...
मन भीतर से शांत हो तो बाहरी दुनिया के शोर तन मन को विचलित नहीं करते मन का तार जोड़ लो प्रभु से तो मानवीय...
यह रास्ता बिना मुसाफिर का बिन मंजिल।
एक परी थी उसने धरती पर एक राजा के घर मानव रूप में जन्म लिया वह एक सुंदर कन्या थी उसकी एक छोटी बहन थी...
दो दिल जब मिलते हैं तो कई जन्मों के मिले होते हैं एक दूसरे के रंग में पूरी तरह से घुले होते हैं एक...
समय का एक दरिया है यह तो बहता रहेगा मैं एक लम्बे समय तक इसके साथ बनी रहूं तो अच्छा रहेगा यह मंजिल तक पहुंचाता...
रात का चांद अभी डूबा नहीं है रात के जाने का और सुबह के आने का इंतजार है सुबह का सूरज भी अभी उगा नहीं...
जिन्दगी तुमसे गुजारिश है कि मेरे साथ चलो एक मेरी ही परछाई की तरह तुम।
दर्द की एक नदी सी बह रही है मेरे अन्तर्मन में पूरे जोर शोर से जोश खरोश से पूरे होशो हवास में पूरे संवाद में...
मेरा जीवन एक निर्जल मरु प्यासी रेत भी।