एक अरसे से सूखी थीं आँखें,
लगा था अब रोना नहीं आएगा।
फिर किसी एक लम्हे ने,
किसी एक नाम ने,
किसी एक याद ने,
बाँध तोड़ दिया।
और वो आँसू जो
आँखों में नहीं,
दिल में जमा थे,
झरने से बह निकले।
ये कमज़ोरी नहीं,
ये तो दिल का बोझ हल्का होना है,
जो बरसों से नहीं रोया,
उसे आज रो लेने दो,
ताकि कल फिर मुस्कुरा सके।
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