रिश्तों में दरार
शोर से नहीं आती,
ख़ामोशी से आती है।
जब हम कहना छोड़ देते हैं,
और सामने वाला
सुनना।
ईंट तो वहीं रहती है,
बस सीमेंट झड़ने लगता है।
रिश्तों में दरार
शोर से नहीं आती,
ख़ामोशी से आती है।
जब हम कहना छोड़ देते हैं,
और सामने वाला
सुनना।
ईंट तो वहीं रहती है,
बस सीमेंट झड़ने लगता है।
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