हर बोली में एक नदी बहती है,
हर शब्द में एक दिया जलता है,
भाषा नहीं, ये माँ की लोरी है,
जो हर दिल को अपना-सा लगता है।
अलग-अलग सुर हैं, पर राग एक है,
अलग-अलग रंग हैं, पर धूप एक है,
भाषाएँ बाँटती नहीं, जोड़ती हैं हमें,
इसी विविधता में मानवता बसती है।
हर बोली में एक नदी बहती है,
हर शब्द में एक दिया जलता है,
भाषा नहीं, ये माँ की लोरी है,
जो हर दिल को अपना-सा लगता है।
अलग-अलग सुर हैं, पर राग एक है,
अलग-अलग रंग हैं, पर धूप एक है,
भाषाएँ बाँटती नहीं, जोड़ती हैं हमें,
इसी विविधता में मानवता बसती है।
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