खुशी के पल
मुश्किल से आते हैं
किसी के घर की देहरी पर
इसे सहर्ष स्वीकार कर
भर लो अपने आलिंगन में
आंखों से बहते आंसुओं के सारे दरियाओं को
तब दो सूखने
जब हसीन पलों के यह लम्हे
कुछ देर के लिए तुम्हें मिलें।
खुशी के पल
मुश्किल से आते हैं
किसी के घर की देहरी पर
इसे सहर्ष स्वीकार कर
भर लो अपने आलिंगन में
आंखों से बहते आंसुओं के सारे दरियाओं को
तब दो सूखने
जब हसीन पलों के यह लम्हे
कुछ देर के लिए तुम्हें मिलें।
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