कोई नजर उठाकर न देखे तो


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कोई तुम्हारी तरफनजर उठाकर न देखे तो
तुम गुलिस्तान में महकते फूलों को देख लो
आसमान में टिमटिमाते सितारों का दीदार कर लो
किसी दरख्त के नीचे बैठकर
उसकी हरियाली की चादर
अपने जिस्म पर ओढ़ लो और
जी भरकर विश्राम करो
एक बहती हुई नदी की कलकल के संगीत को सुनो
एक हवा के थिरकते स्पंदन को महसूस करो
चांद की शीतलता का आभास करो
सूरज के गरिमामयी व्यक्तित्व से
कुछ सीख लो
इस संसार में बहुत कुछ है जिसे
तुम देख सकते हो
उसे सराह सकते हो
उसे अपना सकते हो
छोड़ो न उन सिरफिरों को
जिन्हें तुम्हारी मन की सुंदरता नहीं दिखती
तुम प्रकृति की मनोहारी छटा निहारते
उसके सानिध्य में रहो और
अमानवीय अत्याचारों से
एक पल को अशांत मत हो।


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