सुनो
आकाश के सूर्य
तुम आज उदित हो जाओ
कहीं ऐसा न हो कि
तुम्हारे बिना
मैं कहीं तुम्हारी गर्माहट से वंचित होने के कारण
सांझ तक
एक कोमल पत्ती सी मुरझा जाऊं
मेरी सांसों की रफ्तार धीमी पड़ जाये
मेरी आंखों की रोशनी कम हो जाये और
मेरे दिल में जलता एक सूरज भी तुम्हारी ही तरह
डूब जाये।
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