मेरे जीवन का अनुभव तो
मुझे रह रहकर एक ही बात याद
दिलवाता था कि
हर रात के बाद एक नई सुबह का
आगमन होता है
हर अंधकार के पश्चात एक रोशनी का
अंबार दिखता है
हर मायूसी के बाद एक उम्मीद की
किरण किसी के बुझे हुए दिल में
जागती ही है
यह सब कथ्य अपनी जगह
बिल्कुल सही प्रतीत हो रहे हैं लेकिन
यह रात कुछ ज्यादा लंबी लग रही है
ऐसा मालूम होता है कि
यह रात सुबह का उजाला लेकर ही
नहीं आयेगी
हो सकता है
हर किसी पर यह बात लागू न भी
होती हो लेकिन
मेरे पर होती तो लग रही है
क्या पता यह रात मेरे जीवन की
अंतिम रात हो
आदमी भी कितना कमजोर प्राणी है
उसके मन में न जाने संशय कई बार
क्यों घर कर जाता है
उसके ऊपर नकारात्मकता बेवजह हावी
होकर
उसका जीवन के प्रति दृष्टिकोण ही
बदल देती है
उसके भीतर डर का कीड़ा अनायास
रेंगने लगता है लेकिन
जो वह सोच रहा होता है
वह हमेशा सच साबित नहीं होता
एक उम्मीद की किरण कहीं से
एकाएक लहराती है
उसके मस्तिष्क के पटल पर
आसमान से एक सितारा भी टूटता है
और उससे उसी पल
अपने लिए कुछ अच्छा
मांगने की दुआ पढ़े
यह गुजारिश करता है
अंधकार का कहर धीरे-धीरे
कम होने लगता है
सूरज की किरणें आहिस्ता आहिस्ता
अपना घेरा चारों दिशाओं में
बढ़ाने लगती हैं
मन का दीपक जो बुझने चला था
एक बार फिर रोशनी की जगमगाहट से
नहा उठता है
इस बार वह एक प्रण तो लेता है कि
चाहे जो भी हो जाये
वह अपनी आखिरी श्वास तक
उम्मीद का दामन अब किसी
हाल में भी नहीं छोड़ेगा।
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