यह विश्वास की कहानी


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कोई विश्वास की इमारत
एक दिन में नहीं बनती
उसे खड़ा करने में
बरसों की कड़ी मेहनत होती है
पहले ईंट रखने में
मन में विश्वास जागृत होता है तब ही
कोई दूसरी ईंट उस पहली पर रखने की हिम्मत
जुटा पाता है अन्यथा नहीं
यह विश्वास की कहानी
आहिस्ता आहिस्ता आगे बढ़ती है
एक भी ईंट विश्वास की
जो अपनी जगह से हिली तो
पूरी विश्वास की इमारत उसी पल
ढह जाती है
उस रिश्ते की नींव फिर कमजोर पड़ जाती है
उस पर दोबारा एक नये सिरे से
विश्वास की इमारत खड़ी करना
एकाएक संभव नहीं
किसी एक व्यक्ति पर गर एक लंबे समय तक
विश्वास किया और
वह कभी टूटा तो
ऐसा कोई नहीं बचता जो फिर
शक के घेरे में न आता हो
विश्वास तो बहुत जल्दी किसी पर करो नहीं
कोई जो तुम पर करता है तो
कोशिश करो कि
उसका तुम पर बना विश्वास
तुम तोड़ो नहीं
किसी का विश्वास तोड़ने का
सीधा-सीधा मतलब है
उसका दिल तोड़ना
उसको भ्रमित करना
उसको व्यथित करना
उसका प्रेम जैसे भाव पर से भरोसा
उठाना
उसका खुद पर से ही विश्वास को
पूर्ण रूप से खत्म कर देना।


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