अपने ही घर में
जब कहने को वो कुछ अपने
जब आपस में बहुत ही अपनाहट से
कोई बातचीत कर रहे होते हैं और
उसमें जिसे आवश्यक नहीं समझते
उसे अनदेखा कर
उसे शामिल नहीं करते और
उनकी बातचीत के दौरान
उनके करीब से होकर गुजरते हुए
आंख कुछ देख ले और
कान कुछ सुन लें तो
मन को बहुत बुरा लगता है
घर के बाहर
कहीं भी जैसे कि
राह चलते
स्टेशन की बेंच पर बैठे
रेलगाड़ी के सफर में
बस अड्डे
पार्क में
मंदिर में
किसी भी सफर के दौरान
किसी भीड़भाड़ वाली जगह
मेले में
बाजार में
लोगों की गुफ्तगू अक्सर
उनके पास से गुजरते हुए
कानों में
न चाहते हुए भी
पड़ ही जाती है
इस दुनिया के
लोगों के जीने के
अंदाज
उनके किस्से कहानियां
दिलों के भेद या
उनकी ढेर सारी बातें
उनके जीवन के रंग
ऐसा बहुत कुछ
एक झटके में समझ आ जाता है
बिना एक भी पैसा खर्च किये
दुनिया भर का ज्ञान और
मनोरंजन उपलब्ध हो जाता है
राह चलते अजनबी
अपनी वार्तालाप में शामिल न करें तो
दिल दुखता भी नहीं
वह भी दिल खोलकर अपनी
बातें करते हैं
मैं भी हूं उनके लिए अंजान तो
बात दूर तलक जायेगी
इसकी होती उन्हें परवाह नहीं।
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