यूं तो
मेरा दिल
एक प्रेम छलकाता सागर है लेकिन
न जाने क्यों
मेरी आंखें खुली हों या
हों बंद
मुझे दिन रात
सुबह दोपहर शाम
हर पल, हर जगह
बस मेरे मां-बाप ही नजर
आते हैं
इस संसार में
मैंने हर रिश्ते में
मिलावट पाई है
एक मां-बाप ही ऐसे मिले
जिनमें लेशमात्र का भी
कहीं से बनावटीपन नहीं था
इतने अच्छे मां-बाप को
पाकर
मैं धन्य हुई
भगवान को पाने की
अब मेरी कोई इच्छा नहीं
मां-बाप के रूप में
मैं भगवान के साक्षात दर्शन
कर चुकी हूं
प्रेम का अर्थ मैं गहराई से
उनकी बदौलत ही समझ पाई हूं
उन्हीं के कारण
मुझे प्रेम की कहीं कोई कमी नहीं
किसी से घृणा नहीं
किसी से कोई अपेक्षा भी नहीं
दरअसल प्रेम का जो बीज
मेरे दिल की बगिया की
मिट्टी में वो बो गये थे
वह एक बहुत ही घना
खुशबूदार फल फूलों से
लदा फदा वृक्ष बन चुका है
जो समय के हर बिंदु पर
खुले नयनों से या
बंद नयनो से या
फिर स्वप्नों में
उनका स्मरण कर
हर समय चहुं दिशाओं में
लहराता रहता है।
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