दीपक जलते हुए ही
अच्छे लगते हैं
बुझे हुए नहीं
दीपक की लौ
चाहे तो
जलती बुझती रहे
हल्की-हल्की
एक टूटते तारे से टिमटिमाती रहे
एक जुगनू की रोशनी सी ही
जगमगाती रहे लेकिन
दीपक की लौ
जलती रहे
एक लंबे समय तक
यह कामना तो अंधकार भी
करेगा
सूरज की रोशनी
के साथ-साथ
इसकी रोशनी भी पाने के लिए
एक दीपक का जलते रहना
होता सिर्फ उसके नियंत्रण में तो
वह भला बुझना ही क्यों चाहता
जलता रहता फिर वह तो
सदा के लिए
ऐसा तो संभव चाहे न भी
हो लेकिन
वह जलता रहे
एक लंबे समय तक
इस प्रयोजन में
बाह्य कारक उसको
सहयोग तो प्रदान कर सकते ही हैं।
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