बचपन में
जैसे कोई पिता रखता है
अपने बच्चों का ख्याल
खास तौर पर अपने बेटे का
ठीक उसी तरह
बेटे की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि
वह अपने माता-पिता के बुढ़ापे में
उनका सहारा बने
उन्हें कोई बोझ न समझे
उन्हें खुश रखने का प्रयास करे
एक बाप बेटे के रिश्ते में
कभी कोई दरार न ला सके
यह तो इन दोनों पर ही निर्भर है
कभी कोई तीसरा व्यक्ति
इन दोनों के बीच आकर
इस रिश्ते में आग लगाने की
कोशिश करे तो
उसे तत्काल प्रभाव से
बीच में से हटायें
इस दुनिया में
सब कुछ मिलेगा लेकिन
एक पिता को उसके दिल का टुकड़ा
और
एक बेटे को पिता का उसके सिर पर
चमकता सूरज का साया
एकाएक ढूंढे से भी नहीं मिलेगा।
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