अपनों का साथ ऐसा
जैसे जीवन के सफर में
संग चल रही हो
कोई चांद तारों की बारात
रेगिस्तान में भी
फूल खिलते दिखें
पतझड़ के मौसम में बहार
जो सूरज सांझ को
ढल रहा हो
वह उगता दिखे
रात के अंधकार में दिखे
सुबह की रोशनी का प्रकाश
जीवन की हर समस्या का
समाधान हो जाये
तन के बोझ
मन की पीड़ा
सब जड़ से छूमंतर हो जाये
ऐसा होता है
अपनों की अपनाहट में
जादू।
0 Comments