यह ब्रह्मांड
बहुत है विशाल और
मैं इसका एक छोटा सा कण और
वह भी मिट्टी से बना हुआ
किस बात पर फिर
मैं या कोई इतराये
इस मिट्टी से ही उपजे और
अंत में
मिट्टी में ही मिल जाना
जितनी भी सांसें जीने को पर जो
मिलें
उसमें एक सोने के आभूषण सा
तो पर है अवश्य ही दमकना
कुछ तो मान रखना है इस
संपूर्ण जगत का
उसके पालनहार का
उसके रक्षक का
इस सृष्टि का जो हम सब
एक अहम हिस्सा हैं तो
इसके प्रति कुछ दायित्व भी
बनता है हमारा
इस जीवन से जुड़ी हर सच्चाई को समझें लेकिन
बस इसके भंवर में फंसें नहीं
ब्रह्मांड की गतिविधियों
के साथ तालमेल बिठाते हुए
बस अपना थोड़ा सा समय
इस संसार में काट लें बाकी
ज्ञानी से अच्छा है
अज्ञानी बने रहना।
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