प्रतिशोध की अग्नि में
जो जलोगे तो
खुद ही जलकर राख हो जाओगे
इस तरह की भावनायें
जैसे कि किसी से बदला लेने की ठान लेना
कुछ साथ लाती हैं तो
बस नकारात्मकता
कोई संतुष्टि जैसे भाव का
उपहार साथ नहीं लाती
कोई कभी अपमानित करे तो
बेहतर विकल्प है
उससे थोड़ी दूरी बना लेना
किसी से दुश्मनी पाल लेना तो
कभी भी कोई समझदारी नहीं
लोग उकसायेंगे
भड़कायेंगे
उत्तेजित करेंगे लेकिन
कुछ सिर पर पड़ी तो
सबसे पहले मैदान छोड़कर भाग
जायेंगे
किसी व्यक्ति विशेष के जाल में
उलझने से अच्छा है कि
अपने महत्वपूर्ण कार्यों की सूची को लंबी करके
उसमें समर्पण भाव से जुड़ा जाये
यह सोच जीवन में स्थायित्व
लायेगी
ना कि किसी से प्रतिशोध
लेने की दुर्भावना।
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