सुनो आकाश
तुम्हारा नीला आसमानी रंग
एक पंछी सा कहां उड़ गया
यह तुम सूरज के रंग में घुलकर
एक नारंगी आंचल से
इधर से उधर क्यों लहरा रहे हो
एक साथ
इतने सारे पंछी
उड़ते हुए
तुम्हारे अस्तित्व के दायरे में
बहुत सुंदर प्रतीत हो रहे हैं
यह अपनी-अपनी धुन में मगन
न जाने कितनी ही अनगिनत
दिशाओं की ओर उड़ रहे हैं
कभी लगता है कि तैर रहे हैं तो
कभी महसूस होता है कि विचर रहे हैं
जो भी कह लो पर
जैसे भी सही
कुछ न कुछ तो कर ही रहे हैं
अपने जीवन की सार्थकता को
कुछ तो समझने की चेष्टा कर ही रहे हैं
अपने रास्ते
अपनी मंजिल
अपने सपने
यह सब पाने की कोशिश
अपनी समझ
अपने हौसले
अपने दम पर कर रहे हैं।
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