कुछ लोग
अपने घर के दरवाजे
खुले रखते हैं
सिर्फ और सिर्फ
अपने लिए
अपने परिवार के लिए और
अपने भगवान के आगमन के लिए
कभी-कभार उनके लिए भी
जिन्हें वे थोड़ा बहुत पसंद
करते हैं
यह भी पर अस्थाई तौर पर
पसंद नापसंद की परिभाषायें भी
बहुत तेजी से बदलती रहती हैं
आजकल परिवार क्या है
पति-पत्नी और उनके बच्चे
पत्नी का पूरा खानदान
पति के परिवार का पूरे का
पूरा मैदान साफ
पति भी पता नहीं क्या सोचकर
अपनी पत्नी का इस विशेष कार्य या मिशन में
पूरे समर्पण भाव से सहयोग करता है
कहीं तो वह भी है अपने घर वालों
के खिलाफ
तभी तो पत्नी हो पाई अपनी
इस योजना में सफल
इस जीवन भर की तपस्या पर उसकी
कहीं
पानी न फिर जाये तो
पति के परिवार के किसी भी
सदस्य की तरफ अब तो कभी
आंख उठाकर देखना ही नहीं है
रही बात समाज की तो
उसे तो प्रभावित करने के लिए
कुछ न कुछ ठोस कार्य करते ही रहना है
भगवान को भी प्रसन्न रखना है
कहीं यह न हो कि
वह इन पापियों के संहार करने पर
किसी पल क्रोधित होकर एकाएक
उतर आयें और
फिर काबू में ही न आयें।
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