अपनेपन का अहसास होता अपना सा


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कोई फूल
अपने उपवन में
खिलता है तो
मन का फूल भी
प्रसन्नता से खिल उठता है
कोई चिड़िया
अपने आंगन की
पेड़ की डाली पर चहकती है तो
एक परिंदों का अनदेखा जहां
करीब से देखने को मिल जाता है
कोई बारिश का पानी
अपने घर की छत भिगोता है तो
उसमें नहाने और कश्ती चलाने का
मन बच्चों की शरारत सा ही
हिलोर मारने लगता है
कोई सूरज सुबह आंख खुलते ही
जो अपने कमरे के दरवाजे या
खिड़की पर दस्तक देता है तो
महसूस होता है कि
यह सवेरा एक नई आशा की
किरण शायद मेरे लिए ही
उपहार स्वरूप लेकर आया है
अपनेपन का अहसास होता  
कुछ अपना सा ही है
कोई तुम्हें कितना भी पराया
क्यों न कर दे
खुद का साया जब अपने साथ है
तो फिर अंधेरों का खौफ कैसा।


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