रिश्तों की डोर
कभी कच्ची पड़ने लगती है तो
कभी टूटने की कगार पर पहुंच जाती है लेकिन
यह रिश्ता कुछ ऐसा है अटूट कि
इसकी डोर टूटती नहीं
यूं तो लाख चाहते हैं
कुछ लोग कि
यह दिल के रिश्ते भी टूट जायें
होती रहे यहां भी तकरार
पड़ जाये इनमें भी दरार
फिर भी
कोई रूहानी ताकत होती है जो
इन रिश्तों को संभाले रखती है
इनकी लाज बचाये रखती है
इनकी मान मर्यादा को संभाले रखती है
एक कृष्ण की तरह ही
द्रौपदी का चीर हरण होने नहीं देती
उसकी इज्जत आबरू की रक्षा करती है
उसके विश्वास की डोर को कहीं से जीर्ण-शीर्ण
होने नहीं देती।
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