समय की धारा के संग जो बहे


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तन भी सुंदर
मन भी सुंदर
एक फूलों की बहार की रंगत
समेटे
गुलशन में खुशबू लूटाते
गुलाब के एक अंबार सी सजी खड़ी है
मेरी प्यारी बहना
दूर देश में रहती है
चिड़ियों सी चहकती है
कलियों सी चटकती है
परियों की कहानियों सी
मिसरी सी मीठी बातें करती है
दिल की धड़कनों में हरदम ही
बसी रहती है
कोयल सी कूकती रहती है
शहद सी मीठी है
विविध कलात्मक, रचनात्मक व भावनात्मक रंगों से भरी
एक बेजोड़ तितली है
गुणों की वह एक खान है
रात्रि में, स्वप्न में
पायलों सी खनकती
उसकी पहचान है
कहीं से भी वह एक पल को न
लगे कि
वह कोई मेहमान है
समय की धारा के संग जो
अंगुली पकड़कर बहे
ऐसी अपनात्व से भरी वह
एक बेमिसाल
जीवन रूपी बेड़े को पार लगवाने में
लगातार ही सहयोग करती
नौका की पतवार सी
एक जीती जागती जिंदा,
रिश्तों को एक सुंदर आकार देती
अचंभित करती
दुनिया के सातवें अजूबे सी
कोई महानतम मिसाल है।


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