कहने को
यह घर अभी भी
एक घर सा ही दिखता है
नहीं है यह राख या भस्म का
कोई टीला लेकिन
जो इसमें रहता है
उससे पूछो तो 'है'
दिखता है एक पुख्ता इमारत सा लेकिन
यह है एक राख का ढेर मात्र ही
एक घर घर कहां गर
उसमें रह रहे लोगों के बीच
प्यार की कोई भावना ही न हो
उनके बीच कोई संवाद ही न हो
उनके बीच कोई लेनदेन का
व्यवहार ही न हो
हंसी की कोई गूंज न हो
जहां नजर दौड़ाओ बस
आंसुओं का बहता एक सैलाब हो
जहां पेड़ लगे हों अनेक लेकिन
न हरे भरे हों
न हरियाली देते हों
न फल, फूल, छांव
सूखे पड़े हों
मुरझाये पड़े हों
पतझड़ की मार से बेहाल
बहारें इस पर कभी जो
सावन के बरसने पर भी
लौटकर न आती हों
ऐसे घर को घर नहीं
शमशान कहा जाता है
एक आग लगा जंगल कहा जाता है
एक रोंगटे खड़े कर देने वाला
बियाबान, नश्तर चुभाता
किसी नाग सा डसता
अजगर सा निगलता
कांटों का मरुस्थल कहा जाता है।
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