यह जिंदगी उधार की भी एक प्रतीक्षा कक्ष सी ही


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कोई भी प्रतीक्षालय
बना ही होता है
इस मकसद के साथ कि
वहां कोई आराम से बैठकर या खड़े होकर
प्रतीक्षा करे
किसी घटना, प्रसंग, नियुक्ति, भेंट आदि के लिए
रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, हवाई अड्डे, अस्पताल, कार्यालय, अन्य सार्वजनिक स्थल जैसे सिनेमा हॉल, थिएटर, रेस्तरां आदि के
प्रतीक्षा कक्षों के बारे में
आमतौर से सबने सुना होगा लेकिन
किसी को कभी यह महसूस नहीं होता कि
यह जिंदगी उधार की भी
एक सफर सा ही है और
इसका हर रास्ता, हर मोड़, हर पड़ाव, हर दोराहा, हर तिराहा, हर चौराहा, हर मंजिल, हर सफर, हर यात्रा,
हर समय, हर पल एक प्रतीक्षा कक्ष ही है
कोई भी क्षण एक आखिरी क्षण साबित हो सकता है जो
इस इंतजार की अवधि जो बहुत लंबी, लंबी, मध्यम, छोटी या बहुत छोटे आकार की हो सकती है को समाप्त करता है
मौत जिंदगी की धड़कन को हर लेती है और
इस संसार से किसी दूरगामी स्थान के लिए प्रस्थान होता है
यह प्रतीक्षालय जो था बस कुछ समय के लिए तुम्हारा साथी को अंततोगत्वा भारी मन से अलविदा कहना ही पड़ता है।


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