सादगी भरा व्यक्तित्व चुभता एक कांटे सा


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किसी के हृदय की सरलता को
भला कौन समझता है
आजकल के जटिलताओं से भरे
जमाने में
दर्पण भी नकार देता है
किसी के भोलेपन को
वह भी अब फिदा है
उलझा हुआ है
फंसा पड़ा है
हुस्न के जलवे बिखेरती बालाओं के मायाजाल में
अपनी बगिया में भी
फूल कोई सुंदर ही लगाता है
महकता हो लेकिन
दिखता भद्दा हो तो
हर कोई उसे ठुकराता है
लच्छेदार बातें ही पसंद आती हैं सबको भले हो उसमें भरपूर नुकसान
सादगी भरा व्यक्तित्व तो आज के युग में
हर किसी को एक कांटे की भांति चुभता है
महफिल सजनी चाहिए
एक अहम को संतुष्ट करते
बनावटीपन से
किसी का सादापन जाये भाड़ चूल्हे में।


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