मैं चाहती हूं
जैसे तुम अब मुस्कुरा रहे हो
वैसे ही सारी उम्र मुस्कुराते रहो मुस्कुराते तुम हो
दर्द दिल के मेरे कम हो जाते हैं
किसी को खुश देखकर
मन को कितनी तसल्ली मिलती है किसी की खुशी बदस्तूर बरकरार रहे यह तमन्ना भीतर के किसी कोने से बरबस जगती है
काश! आये कभी न कोई आंसू
तुम्हारी आंखों में
तुम्हारी आंखें भी मुस्कुराती
दिखें मुझे
तुम्हारे मुस्कुराते लबों की ही तरह तुम्हारा जर्रा जर्रा मुस्कुराये
किसी बाग में पेड़ की डालियों पर झूलते
गुलाब के फूलों की तरह।
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