मैं तुम्हारी आंख बनती हूं


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आंख होते हुए भी
जो तुम्हारी आंख नहीं है तो
मैं तुम्हारी आंख बनती हूं और
दिखाती हूं तुम्हें सच
रूबरू कराती हूं तुम्हें
हकीकत के पटल से
आसमान में जो उड़ रहे हो
वहां से उतारकर धरातल पर
ले आती हूं और
जमीनी सच्चाई का दर्पण तुम्हें
दिखाती हूं और
वह भी समय रहते
इतनी सब कोशिश करने पर भी
तुम्हें जो कुछ समझ न आये तो
उसका फिर मेरे पास कोई
इलाज नहीं
तुम्हारे दिल और दिमाग की
मैं कोई शल्य चिकित्सा करके
उसे सच देखने और समझने के
लायक नहीं बना पाऊंगी
यह तो जब खुद पर
बीतता है तभी
जीवन के अनुभवों के साथ
समझ आता है
अन्यथा नहीं
सब कुछ जीवन में ठीक से चल
रहा हो तो
जीवन की कड़वी सच्चाइयों से
मनुष्य सारी उम्र अनभिज्ञ ही
रहता है
मेरा काम है तुम्हें बताना
तुम उस पर कोई कार्यवाही
न करो तो
मैं किसी भी अंजाम के लिए
फिर जिम्मेदार नहीं।


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