जिंदगी जो मिले तो
एक जिंदगी सी ही लगनी चाहिए
एक उत्सव की तरह
इसे मनाना चाहिए
इसे एक उपहार सा पाकर
मन में प्रसन्नता का बिखराव
होना चाहिए
इसकी परिस्थितियों से गुजरते हुए कभी तनावग्रस्त नहीं होना चाहिए कभी कोई शोक नहीं मानना चाहिए
आंख से कोई आंसू बहता
किसी को दिखना नहीं चाहिए
कुछ हासिल हो जाये तो
ठीक
नहीं हो तो
सब कुछ हासिल होकर भी
कभी कुछ हासिल कहां होता है का भाव रखना चाहिए
मन में संतुष्टि होनी चाहिए
लालच नहीं
मन में विजय होनी चाहिए
पराजय नहीं
मन में पूर्णता होनी चाहिए
शून्यता नहीं
हाथ खाली होने पर भी
लगना चाहिए कि
मेरी मुट्ठी भरी हुई है
मैंने जो चाहा
वह पा लिया
जो मन सोच लेता है
अंत में सत्य वही होता है
ईश्वर मन में बसते हैं
यह संसार मन में विद्यमान है
बाहर खोजने पर कुछ नहीं मिलता भीतर से जो कोई पूरा भरा है तो
बाहरी दुनिया तो एक आडंबर है
एक मिथ्या है
एक चमकता हुआ खाली
खोखला बेरंग आवरण मात्र है।
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