यह दो नदियां हैं जो


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तन के दर्द का
असर मन पर पड़ता है और
मन के दर्द का
प्रभाव तन को झकझोर देता है
तन का दर्द
मन का दर्द
यह दो नदियां हैं जो
साथ-साथ बहती हैं
एक दूसरे के समीप
एक दूसरे को स्पर्श करती हुई
इस जिंदगी के किसी भी
मोड़ पर
दर्द दस्तक दे ही देता है
यह मन के भीतर ही कहीं
छिपा होता है
एक तय समय पर उभर कर दिखाई पड़ ही जाता है
यह बदलता रहता है
एक मौसम की तरह
कभी कम
कभी ज्यादा लेकिन
जड़ से खत्म होने का नाम
नहीं लेता
एक बार जो इससे
आमना सामना हो गया तो
समझ लो कि
जीवन भर के लिए
एक हमसफर की तरह
यह तुम्हारा हमेशा के लिए
हो गया
मरते दम तक फिर
यह तुम्हारा साथ
कभी नहीं छोड़ेगा।


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