जो रंग थे प्यार के
वह थोड़े थे
पूरे नहीं और
जब कभी कहीं होती है अपूर्णता
वह अपूर्णता ही होती है
वह कभी पूर्ण नहीं होती
थोड़ा सा भी संशय हो
मन में
कभी प्रेम को लेकर तो
कदम तत्काल प्रभाव से पीछे लौटा लें यह जो समझा कि
समय के साथ सब ठीक हो जायेगा तो ऐसा समय कभी नहीं आता
प्रेम के रंग हमेशा पूरे होते हैं
अधूरे नहीं
प्रेम की प्राप्ति से
आप पूर्ण होते हो
कहीं थोड़ी सी भी रिक्तता है तो
वह प्रेम किस काम का
जीवन की तस्वीर प्रेम की जो
बनानी है तो
संपूर्ण रंगों का इस्तेमाल करते हुए अन्यथा
इसे छोड़ दो अपने ही स्वरुप में
बिना प्रेम के रंगों से रंगे।
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