कांच की प्याली थी


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कांच की प्याली थी
फर्श पर गिर पड़ी
टूटी तो नहीं पर
उसमें हल्की सी एक दरार आ गई
टूटी नहीं
फिर भी
किसी काम की न रही
इसमें चाय या कॉफी या
कोई पेय पदार्थ डालो तो
थोड़ा-थोड़ा रिसने लगता है
मेरा इसके साथ जो नाता
था
वह अब आगे कैसे चले
क्या इसमें बिना कुछ डाले
कुछ पीने की कोशिश करूं
ऐसा जो किया तो
एक नोंक चुभ गई
मेरे लबों में और
लहू बह निकला जो
बूंद बूंद टपक गया
उसके खालीपन में
उसका कर्ज जो मुझ पर
था
उसे मैंने इस तरह से
उतारा
उसकी तन्हाई को मैंने भर
दिया अपने रक्तरंजित लबों के चुंबन के आलिंगन से।


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