कोई शीशा चटक कर
चकनाचूर हो जाये
उसे दोबारा उसकी यथास्थिति में लाना एक असंभव कार्य है लेकिन
एक सपना जो मन मुताबिक पूरा न हो तो
मानव मन को निराश होने की कोई आवश्यकता नहीं है
उसे एक नये सिरे से सपनों की दुनिया सजाने की हिम्मत
खुद में जुटानी ही चाहिए
एक के बाद दूसरा
दूसरे के पश्चात तीसरा
सपना देखते रहो
यह पूर्ण हों या रह जायें
अधूरे लेकिन
स्वप्नों की बारात अपने
नयनों के दर्पण में सजाने से
कभी खुद को न रोकें।
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