यह खामोशी का गहरा सन्नाटा फिर टूट जायेगा


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शांति जब भी भंग होती है
बहुत शोर करती है
एक आंधी के वेग सी तेज होती है और चारों तरफ
बहुत तबाही मचाती है
किसी का चेहरा उदास हो
उसके लबों पर हल्की सी
जबरदस्ती की मुस्कुराहट हो
वह अपने तनाव को छिपाने की भरसक कोशिश कर रहा हो
उसकी आंखों से एक भी आंसू
बहकर बाहर न निकल रहा हो
वह मोम का कोई बुत नहीं
एक पत्थर की शिला प्रतीत हो
रहा हो
कुछ भी कह पाने में
असमर्थ सा लग रहा हो
एक नजर ऐसे में मिलाना उसकी
नजर से और
उसे थोड़ा सा उकसाना
कि वह अपना हाले दिल बयां
कर पाये
फिर देखना कैसे फूटता है
एक दर्द का झरना बिना रुके
यह खामोशी का गहरा सन्नाटा
फिर टूट जायेगा
गम के दरियायों के न जाने
कितने बांध फिर टूटेंगे
बेतहाशा शोर करते हुए
उन्हें रोकना फिर
एक मुश्किल काम होगा
उनको बांधना फिर कठिन होगा
उनकी आवाज को फिर
खामोश करना
एकाएक फिर न मुमकिन होगा।


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