यह खेल रोशनियों का


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अंधकार गहराता जा रहा है
उस जलते हुए दीपक की रोशनी
समय के साथ
शनैः शनैः क्षीण हो रही है
उसका स्थान ले रहा है
रात्रि का चमकता हुआ चांद
दूर होकर भी दिल के करीब
होने का अहसास करा रहा है
चांद की चमक के सामने
फीका पड़ रहा एक जलता बुझता सितारे का लश्कारा
यह खेल रोशनियों का रात भर
ऐसे ही चलता रहेगा जब तक
सुबह सूरज उगकर अंधकार को
जड़ से समाप्त न कर दे और
अपना स्थायित्व सांझ होने तक
अपने तय स्थान पर
कायम न कर ले।


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