इस जिंदगी को
जीने के लिए
अपना दिल कितना बड़ा करूं मैं
कुछ भी करने की एक सीमा होती है एक गुब्बारे को भी एक हद तक ही फुला सकते हैं
यूं तो वह फूलता हुआ ही
अच्छा लगता है लेकिन
एक समय सीमा के पश्चात
उसका अंजाम क्या होगा
यह सर्वविदित है।
इस जिंदगी को
जीने के लिए
अपना दिल कितना बड़ा करूं मैं
कुछ भी करने की एक सीमा होती है एक गुब्बारे को भी एक हद तक ही फुला सकते हैं
यूं तो वह फूलता हुआ ही
अच्छा लगता है लेकिन
एक समय सीमा के पश्चात
उसका अंजाम क्या होगा
यह सर्वविदित है।
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